नई तकनीकी से लेस होगी यूपी की सड़कें, डिप्टी सीएम ने दी हरी झंडी

December 9th, 2017 | POLITICS

नई तकनीकी से लेस होगी यूपी की सड़कें, डिप्टी सीएम ने दी हरी झंडी

लखनऊ।  यूपी के डिप्टी सीएम और PWD मंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि यूपी में सड़कों का जाल है, पर तकनीक सही नहीं होने के कारण दिक्कत हुई। अब हम प्रदेश में सड़क बनाने के लिए नई तकनीक का इस्तेमाल करेंगे। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की कमेटी बनायी जायेगी, ताकि प्रदेश में उसको लागू कर कम समय और कम लागत में अधिक टिकाऊ सड़के बना सके। उन्होंने कहा कि पहले सड़को की आयु 5 वर्ष आंकी जाती थी। लेकिन नयी तकनीक से सड़के बनाने में आयु 20 वर्ष तक होगी। उन्होंने कहा कि अब यूपी में 7 मीटर से कम चौड़ी सड़के नहीं बनेगी। श्री मौर्य रविवार को नई तकनीक से सड़कों का निर्माण विषय पर आयोजित कार्यक्रम के बाद लखनऊ कांफ्रेंस के तहत पत्रकारों से बात कर रहे थे। उन्होंने कहा, यूपी में सड़कों का जाल अच्छा है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल ना होने से खामियां हैं। बिहार का कुछ मॉडल प्रदेश में लाएंगे। यही नहीं जो राज्य अच्छा कर रहे हैं उनकी तकनीक को यूपी में लागू किया जाएगा। नई तकनीक को यूपी में लागू करने का काम करेंगे। सड़क निर्माण की नई तकनीक पर आयोजित कॉन्फ्रेंस में यूपी के इंजीनियरों के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए विशेषज्ञों ने घंटों मंथन किया। पीडब्ल्यूडी के विभागाध्यक्ष वीके सिंह के अनुसार, नई तकनीक से सड़क निर्माण के प्रयोगों को कुछ सुझावों के साथ स्वीकार कर लिया गया। नई तकनीक में अब सड़कों का बेस सीमेंट ट्रीटेड होगा। तकनीकी भाषा में इसे सीटीबी एंड सीटी सब बेस कहा जाता है। सड़क की मजबूती के लिए डब्ल्यूएमएम (विभिन्न साइज की गिट्टी) 3.5 प्रतिशत पानी मिक्स डामर और एक प्रतिशत सीमेंट के साथ इस्तेमाल की जाएगी। सबसे ऊपरी सतह पर तारकोल के साथ कम से कम दो फीसदी चूना इस्तेमाल होगा। इससे गिट्टी तारकोल को नहीं सोख सकेगी और ऊपरी परत आसानी से नहीं उधड़ेगी। सभी तरह की ऊपरी सतहों में चूने का प्रयोग होगा। जिन सड़कों पर भारी वाहन चलते हैं, उनके निर्माण में ऊपरी सतह पर भी पत्थर-तारकोल का मिक्स्चर (स्टोन मैट्रिक्स एसफाल्ट-एसएमए) इस्तेमाल होगा। इसके साथ रेजिन (एक तरह का केमिकल) भी मिलाया जाएगा। सड़क की ऊपरी परत से ठीक नीचे वाली परत (डीबीएम या बीएम) में भी एक फीसदी चूने का प्रयोग होगा। यही नहीं शहरी और अर्ध शहरी इलाकों में सड़कों के निर्माण के दौरान एक डक्ट (सीसी नाली) बनाई जाएगी, जिसमें केबल वगैरह डाले जा सकेंगे। सड़क किनारे उचित स्थानों पर ले-बाय (एक अतिरिक्त लेन) बनाई जाएगी, जहां ट्रक आदि खड़े हो सकेंगे।

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