हालत में नहीं हालात से छोड़ा था घर, इस महिला सांसद ने राष्ट्र के सबसे बड़े परिवार से जीती अपनी जंग

November 19th, 2018 | POLITICS

हालत में नहीं हालात से छोड़ा था घर, इस महिला सांसद ने राष्ट्र के सबसे बड़े परिवार से जीती अपनी जंग

अविनाश चंद्र, लखनऊ। 26 वर्ष की आयु में एक अकेली विधवा औरत जिसे अपनों ने ही अपनाने से इंकार कर दिया था 30 मार्च 1982 की रात उसने अकेले ही उस सोच के खिलाफ लड़ने की ठान ली थी जिस सोच ने उसे वहां उस हालात में अकेला छोड़ा था। इस असंभव से सफर में आने वाली कठिनाइयों एवं खतरों से अवगत होने के बावजूद उन्होंने  कभी न रुकने की ठान ली। मैं बात कर रहा हूँ स्वर्गीय श्री संजय गांघी की विधवा पत्नी मेनका गाँधी की। 

चार अलग अलग पार्टी की सरकार में मंत्री पद पर नियुक्त की गयी मेनका गाँधी भारत की तत्कालीन केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री हैं। अपने अब तक के 30 साल के राजनितिक सफ़र में मेनका ने कई उतार चढ़ाव देखा है परन्तु 14 से भी अधिक राष्ट्रिय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार उनकी सफलता की परिभाषा स्वयं ही देते हैं. अपने ऊपर अनेक आरोप एवं आलोचनाओं के बाद भी मेनका गाँधी कभी नहीं रुकी और 25 साल से पीलीभीत की लोकसभा सीट से विजयी रही हैं। 

मेनका पर्यावरणविद और पशु अधिकार कार्यकर्ता होने के साथ-साथ 33 वर्ष की आयु में मंत्री पद की शपथ ले कर सबसे काम उम्र में मंत्री बनने वाली पहली महिला हैं। पीलीभीत ज़िले में जनता के बीच अपनी मौजूदगी दर्ज करने वाली इकलौती सांसद मेनका गाँधी को किसी पार्टी चिन्ह से पहचान नहीं बल्कि उनकी लोकप्रियता उनके सामाजिक कार्यों से उन्हें मिली है।

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