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बॉलीवुड एक्टर्स को एक और बड़ा झटका, डायरेक्टर्स बड़ा फैसला लेने की तयारी में…

फिल्म जितनी बड़ी और महंगी होती है, बड़े सितारों का वेतन उतना ही अधिक होता है. स्टार मंडली ने इसकी कीमत पूरी तरह से ‘वसूली’ कर ली है. लेकिन अगर फिल्म पैसा कमाने में विफल रहती है तो अभिनेताओं को इतना भुगतान क्यों करें? फिल्म निर्माता और फिल्म वितरक उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें भी अपना पारिश्रमिक कम करना चाहिए. फिल्म का निर्माण मूल्य जितना अधिक होता है, अभिनेताओं को उतना ही अधिक मिलता है. जिम्मेदारी निर्माताओं पर है. इसलिए प्रोडक्शन सेक्टर से यह स्वर निकल रहा है कि एक्टर्स को फिल्म के बिजनेस के हिसाब से अपना पारिश्रमिक तय करना चाहिए.

बॉलीवुड में इस समय एक बड़ी फिल्म को असफलता का सामना करना पड़ा है. ‘सम्राट पृथ्वीराज’, ‘शमशेरा’, ‘लाल सिंह चड्ढा’, ‘रक्षाबंधन’ जैसी बड़े बैनर की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर अपना जादू दिखाने में नाकाम रहीं. ऐसे में बॉलीवुड में चिंता का माहौल है. दर्शकों को सिनेमाघरों में वापस लाने के लिए फिल्म निर्माताओं को क्या करना चाहिए, इस पर चर्चा हो रही है. पिछले कुछ वर्षों में असफल हुई हिंदी फिल्मों की सूची बढ़ती ही जा रही है. ‘बच्चन पांडे’, ‘रनवे 33’, ‘हीरोपंती 2’, ‘जयेशभाई जोरदार’, ‘जुग जग जियो’ और ‘एक विलेन रिटर्न्स’ जैसी कई फिल्में हिट रहीं. आमिर की ‘लाल सिंह चड्ढा’ को हाल ही में मिला खराब रिस्पॉन्स, बॉलीवुड पर चिंता के बादल छा गए हैं.

कुछ साल पहले आमिर की ‘दंगल’ और रणबीर कपूर की ‘संजू’ ने सबसे ज्यादा कमाई की थी. हालांकि पिछले दिनों उनकी रिलीज हुई फिल्मों पर दर्शकों ने उतनी प्रतिक्रिया नहीं दी है. अक्षय कुमार की फिल्म ‘रक्षाबंधन’ भी फ्लॉप रही थी.

निर्माता कहानी पर ध्यान देंगे

बॉलीवुड में इस खतरनाक स्थिति के बारे में फिल्म निर्माता आनंद पंडित ने कहा, ‘हर बिजनेस का एक पीरियड होता है. चूंकि थिएटर दो साल से बंद थे, इसलिए दर्शकों ने फिल्म को ओटीटी पर देखा. इसलिए उनकी रुचि बदल गई है. अब वे कई तरह की फिल्में देखना चाहते हैं. ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि दर्शक सिनेमाघरों में आने को तैयार नहीं हैं. ‘भुलभुलैया 2′ ने अच्छा बिजनेस किया है.’ फिल्म इंडस्ट्री के तेजी से बदलते स्वरूप के बारे में आनंद ने कहा, ‘कोरोना में सभी ने खुद को बदल लिया है. पहले हम नाश्ते में इडली, डोसा या पराठा खाते थे. अब हम पिज्जा और पास्ता खाना चाहते हैं. ओटीटी ने बड़े पर्दे को कड़ी चुनौती दी है. इसलिए फिल्म निर्माता उनकी कहानी पर पूरा ध्यान देते हैं.’

यदि कोई निर्माता दो या तीन फिल्मों में बहुत अधिक हार जाता है, तो उसे प्रतियोगिता से बाहर कर दिया जाता है. तो ऐसे समय में कलाकारों को भी निर्माताओं को समझना चाहिए. कुछ कलाकार भी समझते हैं. अभिनेताओं का पारिश्रमिक फिल्म द्वारा किए गए व्यवसाय के आधार पर निर्धारित किया जाना चाहिए.

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