राज्यसभा का चुनाव 23 मार्च को, यूपी पर सबकी नज़र, जाने आखिर क्यों?

February 25th, 2018 | POLITICS

राज्यसभा का चुनाव 23 मार्च को, यूपी पर सबकी नज़र, जाने आखिर क्यों?

लखनऊ। राज्यसभा की 58 सीटों पर 23 मार्च को चुनाव है, जिसमें यूपी की भी 10 सीटें शामिल हैं। देश के 16 राज्यों में यह चुनाव होगा बावजूद इसके यूपी पर ही सबकी नजर है। आखिर क्यों? इसकी कई वजह हैं। पहला, सबसे अधिक 10 सीटों पर यूपी में ही चुनाव हो रहा है। दूसरा, भाजपा के एकमात्र सांसद विनय कटियार रिटायर हो रहे हैं जबकि भाजपा 8 सांसद बगैर कोई मशक्कत के भेज सकती है। वैसे यह संख्या 9 भी हो सकती है। ऐसे में किस किस की लाटरी लग सकती है ये बड़ा सवाल है? तीसरा, शेष सभी सीटें सपा, कांग्रेस व बसपा की हैं। संख्याबल को देखते हुए सपा का एकमात्र उम्मीदवार कौन होगा? चौथा, तीनों दलों में यदि सहमति व तालमेल हो जाता है तो अंतिम सीट के लिए उम्मीदवार कौन होगा? भाजपा में किस किस की लग सकती है लाटरी... भाजपा के एकमात्र राज्यसभा सांसद विनय कटियार का कार्यकाल खत्‍म हो रहा है। उनको अगला कार्यकाल मिलेगा या नहीं, अभी स्थिति स्‍पष्‍ट नहीं है। वैसे, पूरी संभावना है कि आठ सीटें भाजपा जीत सकती है। ऐसा इसलिए क्‍योंकि 2014 के चुनावों में अपना दल और सुहेलदेव समाज पार्टी के साथ मिलकर बीजेपी ने 80 में से 73 सीटें जीती थीं और विधानसभा चुनाव’17 में पार्टी ने 300 से ज्‍यादा सीटें हासिल कीं। अब बड़ा सवाल यह है कि पार्टी किन प्रत्‍याशियों को मैदान में उतारेगी। हालांकि सूत्रों के मुताबिक पार्टी उच्‍च सदन के लिए स्‍थानीय नेताओं के नाम पर विचार कर सकती है। हालांकि महासचिव अरुण सिंह और अनिल जैन, प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री, पिछड़ी जाति के सेल लीडर रमेशचंद्र रतन, अन्य पिछड़ा वर्ग मोर्चा के मुखिया दारा सिंह चौहान सरीखे नेता सूबे से राज्यसभा चुनाव की रेस में अहम उम्मीदवार हैं। तृणमूल कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए मुकुल रॉय का नाम भी चर्चा में है। विपक्ष के लिए राह आसान नहीं है... शेष सभी 9 सीटें विपक्ष के कब्जे वाली हैं, इनमें बसपा अध्यक्ष मायावती के त्यागपत्र से रिक्त हुई राज्यसभा सीट भी शामिल है। एक सीट कांग्रेस के प्रमोद तिवारी और एक बसपा के मुनकाद अली की है। शेष सीटें सपा के किरनमय नंदा, दर्शन सिंह यादव, नरेश अग्रवाल, जया बच्चन, चौधरी मुनव्वर सलीम और आलोक तिवारी की हैं। विपक्षी विधायकों की संख्या देखते हुए इन सबका वापस राज्यसभा पहुंचना काफी मुश्किल है। भाजपा ने यदि आठ उम्मीदवार ही उतारे तब तो विपक्ष के दो सदस्य राज्यसभा पहुंच सकते हैं। पर, उस स्थिति में भी विपक्ष को एक-दूसरे का साथ देना पड़ेगा। बहरहाल, यूपी में राज्यसभा की दस सीटों पर होने वाले चुनाव बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा मुखिया अखिलेश यादव की सियासी राह भी बताएंगे। साथ ही जहां प्रदेश के भावी समीकरणों का संकेत मिलेगा, वहीं दोस्ती व दुश्मनी की कहानी भी सुनाएंगे। इस रहस्य से पर्दा उठेगा कि कौन से नेता प्रदेश में ही आगे की पारी खेलना चाहते हैं और कौन दिल्ली के रास्ते राजनीतिक मंच पर सक्रिय रहना चाहते हैं। यह भी पता चलेगा कि प्रदेश की राजनीति में अपने नाम, बयान या कद के कारण चर्चा में रहने वाले चेहरों में किसको उसका नेतृत्व राज्यसभा में भेजने का इच्छुक है और किसे नहीं।

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