राम मंदिर के डूबते जहाज पर बैठी BJP अब सवर्ण आरक्षण की नईया पर हुई सवार

January 8th, 2019 | POLITICS

राम मंदिर के डूबते जहाज पर बैठी BJP अब सवर्ण आरक्षण की नईया पर हुई सवार

राजनीती के समंदर में आया ऐसा भंवर 
सबने कहा ये है मोदी लहर मोदी लहर
2014 में कांग्रेस पर बरपा था कहर 
सबने कहा ये है मोदी लहर मोदी लहर

 

बात राम मंदिर की हो या राफेल की हर मुद्दे पर चारों तरफ से घिरी हुई भाजपा के लिए अपने डूबते हुए जहाज को बचाने के लिए आरक्षण की नैय्या का सहारा ही बचा सकता है. वक़्त था साल 2014 का चाहे महीना कोई भी हो चर्चा अगर राजनीती की हो तो हर विषय का शीर्षक नरेंद्र मोदी ही थे. विकास का नारा लेकर जब भाजपा दस साल बाद केंद्र में आयी थी तो लोगों को प्रधान मंत्री से लोगों की उम्मीदें आवश्यकता से अधिक थी. कारण था गुजरात में बीते पंद्रह सालों में नरेंद्र मोदी द्वारा किये कार्य और उससे होने वाला विकास. और इस बात का सबसे बड़ा साक्ष्य और क्या होगा जब विश्व की सबसे बड़ी महाशक्ति ने जिस व्यक्ति के ऊपर देश में घुसने मात्र पर रोक लगा दी थी उसे देश ने नरेंद्र मोदी का दोनों बाहें खोलकर स्वागत किया और ऐसा स्वागत किया की प्रधानमंत्री मोदी को सुनने न्यू यॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन पर भारी मात्रा में लोग आये थे उतनी भीड़ आखिरी बार 1972 में एल्विस प्रेस्ले को देखने ही आयी थी. 

साल बीता समय कटा प्रधान मंत्री ने कई बड़े-छोटे फैसले लिए. एक ही साल में दो सर्जिकल स्ट्राइक हुई, एक पाकिस्तान पर और दूसरी जनता के जेब पर. नोटबंदी का फैसला मोदी सरकार को कई सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया. फिर भी लोगों की उम्मीद मोदी सरकार से ख़तम नहीं हुई थी शायद यही वजह थी की वर्ष 2017 में सात राज्यों के विधान सभा चुनाव में भाजपा छह राज्यों में सरकार बनाने में कामयाब रही. नरेंद्र मोदी का कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार होता दिख रहा था. एक समय आ गया था की राजनितिक विशेषज्ञों का कहना था की अब अन्य दलों को 2019 की नहीं 2024 की तैयारी करनी चाहिए. 

एक कहावत है समय और किस्मत बदलते देर नहीं लगती और कुछ ऐसा ही हुआ भाजपा के साथ. आया वर्ष 2018 और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव. हर जगह से अपना सूपड़ा साफ़ होता देख सभी राजनितिक दलों ने गठबंधन की निति बनायीं और हर बार की तरह इस बार भी राजनितिक मौसम को देख कर राम मंदिर का मुद्दा फिर से गर्माने लगा. भले ही सरकार में आने के पूर्व या पश्चात भाजपा राम मंदिर पर कोई भी टिपण्णी कसने के बजाय विकास का राग अलाप रही हो लेकिन पूरे भारत के हिन्दुओं को यकीन था की केंद्र और राज्य दोनों में बीजेपी की सरकार है मंदिर तो बन के रहेगा. फिर चाहे राष्ट्रवाद को भूलते हुए यूपी वासियों को अपने राज्य से भागने वाली शिवसेना हो या हिंदुत्व को लेकर हिंसा करने वाली विहिप.

यह कहना ग़लत नहीं होगा की पांच राज्यों में भाजपा की करारी हार का कारण राम मंदिर मुद्दा है. वहीँ मुझे याद है की अपनी सरकार की कीमत पर बाबरी गिराने वाले कल्याण सिंह का हिन्दुओं ने साथ नहीं दिया था शायद यही वजह है बीजेपी राम मंदिर को दरकिनार कर सवर्णो का भरोसा बनाये रखने के लिए आरक्षण की नयी पालिसी बना दिया. बीते वर्षों में आरक्षण को लेकर हो रही हिंसा राजनीती और मतभेद को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऐसा दांव खेला है की सबकी चुप्पी लग गयी है. सर्जिकल स्ट्राइक तक पे सवाल उठाने वाले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल तक ने इसका समर्थन कर दिया. यही नहीं आरक्षण के इस फैसले ने जाट, मराठा, पटेल, सवर्ण सभी को शामिल कर लिया. अब तक जो आरक्षण का विरोध कर रहे थे अब वो भी सुर में सुर मिला रहे हैं. सोमवार को कैबिनेट की बैठक में लिया गया ये निर्णय आज लोकसभा में पेश हो गया और सभी की सहमति को देख कर लगता है यह क़ानून शीघ्र ही लागू भी हो जाएगा. संविधान में 124 वें संशोधन के लिए पेश किये गए विधेयक में सवर्णो को देने वाले आरक्षण बिल में भाजपा को नयी उम्मीद दिख रही है. यह कहना ग़लत नहीं होगा की नरेंद्र मोदी की लहर को दुबारा उठाने का यह अथक प्रयास होगा. अब देखना ये होगा राम मंदिर के डूबते जहाज के बाद आरक्षण के नैय्या पर सवार भाजपा का यह फैसला कितना कामयाब होता है.
 

Avinash Chandra

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