UP की इन 40 लोकसभा सीटों पर सवर्ण आरक्षण का पासा दिखायगा कमाल, दिख सकता है बड़ा असर 

January 8th, 2019 | POLITICS

UP की इन 40 लोकसभा सीटों पर सवर्ण आरक्षण का पासा दिखायगा कमाल, दिख सकता है बड़ा असर 

UP के नज़रिये से अगर सवर्ण आरक्षण को देखा जाये तो ये बड़ा गेम चेंजर बनकर दिखाई पड़ सकता है. चूंकि अकेले UP की 40 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां का सवर्ण वोटर ही सरकार का निर्धारण करता है. लोकसभा चुनावों के ठीक कुछ महीनों पहले मोदी सरकार के इस फैसले ने सियासत के मैदान में खलबली पैदा कर दी है. और तो और राजनीतिक पंडितों की माने तो ये फैसला उत्तर प्रदेश में भाजपा को दुबारा अच्छा सन्देश देने वाला है. इस फैसले का सीधा असर UP पर पड़ेगा. 

जिस तरह से यूपी का सवर्ण समुदाय अपने आप को मोदी सरकार के कार्यकाल में बिना किसी बड़े फैसले से दूर देख रहा था. वहीं ये फैसला उनके लिए एक बड़ी उमीद बनकर देखा जा रहा है. दूसरी तरफ विपक्ष भी इस फैसले से चित्त है और इसके समर्थन में है. साथ ही उनका कहना है कि वह फैसले का स्वागत तो करते हैं, लेकिन इसे सियासत से प्रेरित भी करार दे रहे हैं. बात अगर हालि में भाजपा को 3 राज्यों में मिली हार से देखा जाये तो भाजपा का आकलन है की सवर्ण समुदाय में रोष इसका सबसे बड़ा कारण है.

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तीन प्रदेशों में हुई हार का मिला फीडबैक बीजेपी को ये बताता है कि सवर्ण मतदाताओं ने जहां भाजपा को वोट नहीं दिया वह नोटा को प्राथमिकता पर रखा है. ध्यान देने की बात ये है कि भाजपा के लिए सवर्ण वोटर काफी अहम रहा है, क्योंकि पार्टी की जीत हो या हार, उसे मिलने वाले मतों में 50 परसेंट योगदान सवर्ण मतदाताओं का ही रहा है.

ख़बरों में आंकड़ा -

UP के नज़रिये से अगर सवर्ण आरक्षण को लोकसभा चुनाव में देखा जाये तो ये बड़ा गेम चेंजर बनकर दिखाई पड़ सकता है. अकेले UP में करीब 40 सीटें ऐसी हैं, जहां सवर्ण वोटर केंद्र सरकार का निर्धारण करते हैं. खास बात ये है कि 2014 के लोकसभा चुनाव में 71 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा को इन 40 में से 37 सीटों पर जीत मिली थी. वहीं 2017 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा की बम्पर जीत के पीछे सवर्ण मतदाताओं का अहम हाथ रहा. इस चुनाव में 1980 के बाद से सबसे ज्यादा भाजपा विधायक सवर्ण वर्ग के जीते. UP विधानसभा में इनका प्रतिशत 44.3 है, जो 2012 की तुलना में 12 प्रतिशत ज्यादा है.

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सीटों पर वोटों के ताने-बाने पर गौर करें तो UP के कुशीनगर, गोरखपुर, संतकबीर नगर, देवरिया, भदोई, वाराणसी, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर, लखीमपुर खीरी, प्रतापगढ़, बहराइच, बाराबंकी, गोंडा, रायबरेली, अमेठी में सवर्ण जातियों का सीधा असर राजनीति पर दिखता है.

उदाहरण के लिए कांग्रेस के गढ़ अमेठी को देखें तो यहां सवर्ण मतदाताओं की संख्या करीब 4 लाख है. इसमें सबसे ज्यादा 1.89 लाख ब्राह्मण, 1.37 क्षत्रिय और करीब 60 हजार कायस्थ, वैश्य और जैन की आबादी है.

मालूम हो की UP में कुल मतदाताओं का 25-28% हिस्सा अगड़ी जातियों का है, जिसमें ब्राह्मण सबसे अधिक हैं. ये आंकड़ा मोटे तौर पर करीब 15 फीसदी माना जाता है. इसके बाद करीब 4 से 5 प्रतिशत क्षत्रिय मतदाता माने जाते हैं. आंकड़ों के अनुसार बीजेपी को हर चुनाव में 50 प्रतिशत से अधिक वोट सवर्ण मतदाता के मिलते आए हैं. 2014 में ये आंकड़ा 80 फीसदी तक पहुंचा.

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