इन 7 बातों पर तैयार होगी सपा-बसपा गठबंधन की मियाद, जानें क्या होंगीं शर्तें?

January 11th, 2019 | POLITICS

इन 7 बातों पर तैयार होगी सपा-बसपा गठबंधन की मियाद, जानें क्या होंगीं शर्तें?

2014 के आंकड़ों को देखा जाये तो सपा-बसपा को गठबंधन में सीटों के बन्दर बाँट के रास्ते एकदम क्लियर हैं. पहले बता दें कि गठबंधन के ऐलान होने की बस अब औपचारिकता ही बची है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि किन-किन सीटों पर कौन कौन चुनाव लड़ेगा? तो आपको बता दें 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणाम के अनुसार सीटों पर दावेदारी निर्धारित होगी. जिन सीटों को पिछले चुनावों में जीता गया था या पार्टियां जिनपर दूसरे नंबर पर थीं उनपर सबसे पहला हक़ उनका होगा. 2014 लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी ने 5 सीटें जीती थीं और 31 सीटों पर नंबर दो रही थी. जबकि, बहुजन समाज पार्टी 34 सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी. कांग्रेस ने 2 सीटें जीती थीं और 6 सीटों पर नंबर 2 रही थी. राष्ट्रीय लोकदल और आम आदमी पार्टी 1-1 सीट पर नंबर 2 रहे थे लेकिन इस नियम में ढील भी दी जाएगी.

ये होगी सपा-बसपा गठबंधन कि रणनीति :-

1. जो भी समझौता होना है उसके अनुसार RLD के लिए 3 सीटें, कांग्रेस के लिए 2 सीटें और सहयोगी दलों के लिए 5 और सीटें रिजर्व में रखी जाएंगी. अभी बस 35-35 सीटों पर कैंडिडेट्स का ऐलान किया जाएगा. दोनों पार्टियां अभी RLD से बातचीत का रास्ता बंद नहीं करना चाहते.

2. संभावना ये है कि सपा-बसपा हर मंडल में कम से कम 2 सीट पर चुनाव लड़ेंगे, ताकि किसी इलाके में एक ही पार्टी का वर्चस्व न हो और दूसरी पार्टी का सफाया नहीं हो. इसके लिए लोकसभा चुनाव में नंबर 2 रहने के नियम की छूट दी जाएगी.

3. कैंडिडेट्स निर्धारण में सपा-बसपा एक दूसरे की भावनाओं का ध्यान रखेंगे. हाल-फिलहाल में पार्टी बदलने वाले या फिर मायावती और अखिलेश यादव के खिलाफ असंसदीय भाषा का इस्तेमाल करने वालों का टिकट कट सकता है.

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4. सुहलदेव समाज पार्टी, अपना दल (कृष्णा पटेल), कौमी एकता दल जैसी छोटी पार्टयों से बातचीत जारी रहने की संभावना है.

5. वाराणसी सीट पर PM मोदी के खिलाफ किसी तीसरे दल के मजबूत उम्मीदवार का समर्थन करने पर विचार किया जा सकता है.

6. समाजवादी पार्टी की ओर से पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा की ओर से पार्टी सुप्रीमो मायावती की अनुमति के बिना मीडिया में कुछ भी बोलने पर सख्ती होगी. मुलायम सिंह यादव को गठबंधन के फैसलों से दूर रखा जा सकता है.

7. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावाती 50 से ज्यादा चुनावी सभाएं साथ कर सकते हैं. पार्टी के और कोई नेता बिना हाईकमान की अनुमति के मंच साझा नहीं करेंगे.

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