जानिए आपका घर शुभ है या अशुभ

February 11th, 2019 | OTHER

जानिए आपका घर शुभ है या अशुभ

घर हमारे लिए बहुत ख़ास होता है। हर घर की बनावट अलग-अलग होती है और बनावट के अनुसार घर शुभ और अशुभ फलदायी होते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपका घर कैसा हैं? क्या आपके घर की बनावट आपके लिए शुभ है। आइये जानते हैं वास्तुशास्त्र क्या कहता है घर की बनावट के बारे में।

सूर्य का मकान : यदि आपका घर पूर्वमुखी यानी घर का मुख पूर्व दिशा की ओर है तो इसे सूर्य का मकान कहा जाता है। इसके अलावा मुख्य गेट पर दाएं हाथ की ओर पानी का स्थान और घर में तेजफल का वृक्ष लगा हो तो यह सूर्य का ही घर होगा। यदि ऐसे घर में हवा से ज्यादा प्रकाश आता है तो यह आपके लिए हानिकारक भी हो सकता है। ऐसे घरों में वास्तु का ध्यान रखा जाना बहुत जरूरी होता है।

चन्द्र का मकान :चन्द्र का मकान अधिकतर पश्चिम या उत्तर कोण में होता है। यदि आपके घर के आसपास कुआं, हैंडपंप, तालाब या बहता हुआ पानी हो या फिर आसपास दूध वाले वृक्ष अधिक हो तो ऐसे घरों को चंद्र का मकान कहा जाता है। ऐसे मकानों के आसपास शनि से युक्त मकान होना हानिकारक माना जाता है।

मंगल का मकान : यदि आपके मकान का मुख दक्षिणमुखी है तो यह मंगलवासी मकान होगा। इस मकान में रहने वाले की कुंडली में मंगल ग्रह है तो यह मकान आपके लिए हानिकारक हो सकता है। यदि मकान दक्षिणमुखी है  तो नीम का पेड़ तय करेगा कि मंगल शुभ असर देगा या नहीं? नीम के पेड़ से दक्षिण दिशा का बुरा असर वैसे कम होता है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं कि घर फलदायी होगा या नहीं।

बुध का मकान :बुध के मकान की निशानी होती है उत्तर दिशा का मकान और मकान अकेला होता है। उसके आसपास ज्यादा मकान नहीं होते हैं। यदि गुरु और चन्द्र के वृक्ष के साथ मकान हुआ तो वह घर बुध की दुश्मनी का घर होगा अर्थात नौकरी और व्यवसाय के लिए हानिकारक होगा।

बृहस्पति का मकान : ऐसे मकान हवादार होते हैं। अधिकतर ऐसे घरों के सामने पीपल का वृक्ष या धर्मस्थल जरूर होता है। घर का मुख्य गेट ईशान या उत्तर में होता है। यहां रहने से मानसिक शांति मिलती है और सदस्यों का मान-सम्मान बढ़ता रहता है।

शुक्र का मकान : यदि पक्के मकान के आसपास कहीं भी कच्चा स्थान छोड़ रखा है तो समझो वहां शुक्र का असर होगा। पूरे घर में फर्श नहीं लगा हो तो शुक्र का घर माना जाएगा| अक्सर गांवों में इस तरह के घर होते हैं, जो शुभ फलदायी होते हैं।

शनि का मकान : पश्चिम दिशा में मुख्य द्वार और उसमें तलघर वाला घर शनि का मकान  कहलाता है। यदि घर में कीकर, आम और खजूर के वृक्ष हो तो भी इसे शनि का मकान ही कहेंगे। यदि घर के पीछे की दीवार कच्ची हो और वह गिर जाए तो इसे खराब शनि का सूचक माना जाता है| ऐसे घरों में वास्तु का ध्यान रखा जाना बहुत आवश्यक होता है।

राहु का मकान : वैसे तो राहु का मकान भयानक अहसास वाला होता है, उसे प्रेत का निवास माना जाता है, लेकिन यदि राहु अच्छा हो तो इससे लाभ भी होता है। नैऋत्य कोण राहु का कोण है। शौचालय में राहु का स्थान होता है। कई दिनों से खाली पड़ा डरावना-सा मकान भी राहु के असर वाला होगा। ऐसे घरों के आसपास कैक्टस, बबूल का पेड़ या कांटेदार झाड़ियां हैं तो यह डरावना होगा और यह राहु का मकान ही कहलाएगा।

केतु का मकान : केतु का मकान शुभ और अशुभ फलदायी हो सकता है। तीन तरफ मकान, एक तरफ खुला या तीन तरफ खुला हुआ और एक तरफ कोई साथी मकान या खुद उस मकान में तीन तरफ खुला होगा तो यह केतु का मकान कहलायेगा।

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