आपको भी जानना चाहिए आपका लोकसभा उम्मीदवार प्रचार पर कितने लाख खर्च कर सकता है

March 11th, 2019 | POLITICS

आपको भी जानना चाहिए आपका लोकसभा उम्मीदवार प्रचार पर कितने लाख खर्च कर सकता है

भारतीय निर्वाचन आयोग ने देर शाम लोकसभा चुनावों की तारीख की घोषणा कर दी. आपको बता दें चुनाव में प्रत्याशी पैसों के आधार पर चुनाव को प्रभावित न कर सकें इस सन्दर्भ में चुनाव आयोग ने सख्त नियम बनाये हैं. एक समाचार एजेंसी के मुताबिक अमेरिका के एक चुनाव विशेषज्ञ ने कहा है कि आगामी आम चुनाव भारत के इतिहास में सबसे महंगा चुनाव होगा.

कार्नेगी एंडॉमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस थिंक-टैंक में साउथ एशिया प्रोग्राम के वरिष्ठ फेलो और डायरेक्टर मिलन वैष्णव ने बताया, '2016 में अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव और कांग्रेस चुनाव में कुल 6.5 (4.62 खरब रुपये) अरब डॉलर खर्च हुए थे. 2014 के लोकसभा चुनाव में एक अनुमान के मुताबिक 5 अरब डॉलर (3.55 खरब रुपये) खर्च हुए थे. इस तरह 2019 के चुनाव में अमेरिकी चुनाव से अधिक ही खर्च होगा और इस तरह भारत का चुनाव दुनिया का सबसे महंगा इलेक्शन होगा.' ऐसे में आइए जानते हैं कि एक उम्मीदवार कितना खर्च कर सकता है और अगर वह नियम तोड़ता है तो क्या होता है.

नियम के मुताबिक एक उम्मीदवार लोकसभा चुनाव में 50 लाख रुपये से 70 लाख रुपये तक खर्च कर सकता है. उसका खर्च उस राज्य पर भी निर्भर करता है जहां से वह चुनाव लड़ रहा है. अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम को छोड़कर सभी राज्यों में एक उम्मीदवार अधिकतम 70 लाख रुपये खर्च कर सकता है. अरुणाचल प्रदेश, गोवा और सिक्किम में उम्मीदवार 54 लाख रुपये तक खर्च कर सकते हैं. यह दिल्ली के लिए 70 लाख रुपये और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 54 लाख रुपये है. वहीं, विधानसभा चुनाव के लिए यह सीमा 20 लाख रुपये से 28 लाख रुपये के बीच है.

इसमें एक राजनीतिक पार्टी द्वारा खर्च किया गया धन या उम्मीदवार के अभियान के लिए एक समर्थकों द्वारा खर्च किया गया धन शामिल है. बता दें कि इसमें पार्टी के कार्यक्रम के प्रचार के लिए किसी पार्टी या किसी पार्टी के नेता द्वारा किए गए खर्च को कवर नहीं किया जाता है. 

नियम के तहत उम्मीदवारों को एक अलग खाता रखना होता है और कानून के तहत उसमें चुनाव खर्च को दर्ज करना होता है. खर्च की गलत जानकारी और तय खर्च सीमा से अधीक खर्च करना जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 10 ए के तहत तीन साल तक के लिए अयोग्यता का कारण बन सकता है. सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों को लोकसभा चुनावों के पूरा होने के 90 दिनों के भीतर अपने चुनाव खर्च का एक बयान चुनाव आयोग को देना होता है. सभी उम्मीदवारों को चुनाव पूरा होने के 30 दिनों के भीतर अपने खर्च का विवरण मतदान कक्ष में प्रस्तुत करना होगा. 

2004 में 14 वें आम चुनाव के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक हुआ था.  2014 के आखिरी लोकसभा चुनावों में 3,870 करोड़ रुपये का खर्च हुआ जो 2009 में 15वें आम चुनाव के लिए किए गए खर्च से तीन गुना अधिक था. 

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