अभ्यर्थियों की ओर से मिली शिकायतों के बाद अब पूरा उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग सीबीआइ के निशाने पर

September 13th, 2018 | CRIME

अभ्यर्थियों की ओर से मिली शिकायतों के बाद अब पूरा उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग सीबीआइ के निशाने पर

उप्र लोकसेवा आयोग ने एपीएस भर्ती 2010 में गड़बड़ी की शिकायतों और प्रदेश सरकार की ओर से सीबीआइ जांच की संस्तुति होने के बाद परीक्षा संबंधित सभी रिकॉर्ड खुद ही सील कर दिया है। जिन्हें सीबीआइ की ओर से मांगे जाने पर खोला जाएगा। अभिलेखों से कोई छेड़छाड़ न करने पाए और सीबीआइ की ओर से मांगे जाने पर कोई भी अभिलेख तुरंत उपलब्ध कराया जा सके, इसके मद्देनजर रिकार्ड सुरक्षित रखे गए हैं। 

पीसीएस समेत अन्य बड़ी परीक्षाओं में गड़बड़ी की सीबीआइ जांच में गंभीर खामियां उजागर हो चुकी हैं। अब बारी अपर निजी सचिव भर्ती परीक्षा 2010 की जांच की है। उप्र लोकसेवा आयोग (यूपीपीएससी) की सीबीआइ जांच में अभी तक पूर्व अध्यक्ष डॉ. अनिल यादव समेत उनके कई सिपहसालार ही फंस रहे थे, अब पूरा यूपीपीएससी ही सीबीआइ के निशाने पर होगा।

एपीएस भर्ती में अभ्यर्थियों की ओर से मिली शिकायतों के दौरान सीबीआइ ने अघोषित रूप से जो दस्तावेज खंगाले उसमें यूपीपीएससी में कार्यरत 15-20 अधिकारी अपने करीबियों, रिश्तेदारों और परिवारीजन का चयन करवाने में जांच अधिकारियों के सीधे निशाने पर हैं।

इन अधिकारियों के नाम तक शिकायतकर्ताओं ने सीबीआइ को सौंप दिए हैं। सूत्र बताते हैं कि शिकायतों के आधार पर प्राथमिक छानबीन करने के बाद ही सीबीआइ ने एपीएस भर्ती 2010 की जांच की तैयारी की और 19 जून को पत्र उप्र शासन को भेजा, जबकि सचिवालय में तैनात तमाम बड़े अफसरों पर भी जांच की आंच आनी तय है। जांच का नोटिफिकेशन सीबीआइ की ओर से अभी जारी नहीं हुआ है लेकिन, चेहरा बेनकाब होने के डर से यूपीपीएससी से लेकर सचिवालय तक खलबली मची है।

यूपीपीएससी दरअसल उत्तर प्रदेश में राजकीय सेवाओं के लिए अफसरों का चयन करने वाली सबसे बड़ी परीक्षा संस्था है और गड़बड़ी के सबसे गंभीर आरोप भी यूपीपीएससी पर ही लगे हैं। अपर निजी सचिवों की भर्ती में गड़बड़ी और प्रदेश सरकार के भी कड़ा रुख अपनाए जाने के कदम से यूपीपीएससी की कार्यशैली ही नहीं, इसकी निष्पक्षता पर भी गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।

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