करुणानिधि को राष्ट्रीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, अंतिम संस्कार कि जगह किया गया दफ़न 

August 8th, 2018 | POLITICS

करुणानिधि को राष्ट्रीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, अंतिम संस्कार कि जगह किया गया दफ़न 

तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और DMK प्रमुख एम. करुणानिधि का मंगलवार शाम 94 साल की उम्र में निधन हो गया। करुणानिधि के निधन के साथ ही तमिलनाडु समेत पूरे देश में शोक की लहर है। करुणानिधि के निधन के बाद उनको दफनाने को लेकर विवाद हुआ। करुणानिधि की पार्टी और उनके समर्थकों ने मांग की कि उन्हें चेन्नई के मशहूर मरीना बीच पर दफनाया जाए और उनका समाधि स्थल भी बने, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने इनकार कर दिया था। 

लेकिन कुछ लोगों के मन में यह भी सवाल उठ रहा है कि हिंदू नेता होने के बावजूद करुणानिधि को आखिर दफनाया क्यों गया?

इसके बाद समर्थकों की मांग को मानते हुए हाईकोर्ट ने करुणानिधि का अंतिम संस्कार मरीना बीच पर करने की अनुमति दे दी, जिसके बाद उनको वहीं दफन कर दिया गया। इसके अलावा कोर्ट ने आदेश दिया है कि तमिलनाडु सरकार उनका मेमोरियल भी बनाए।

दरअसल, तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि द्रविड़ मूवमेंट से जुड़े हुए थे। द्रविड़ आंदोलन हिंदू धर्म की ब्राह्मणवादी परंपरा का खुलकर विरोध करता है और इसके किसी भी रीति-रिवाज को नहीं मानता है।

करुणानिधि के राजनीतिक जीवन की आधारशिला ही हिंदू जाति व्यवस्था, धार्मिक आडंबरों और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ रखी गई थी। वह खुद को नास्तिक कहते थे और धार्मिक आंडबरों और समाज में फैले अंधविश्वास की खुलकर आलोचना करते थे।

करुणानिधि द्रविड़ आंदोलन का आखिरी नास्तिक चेहरा थे. हिंदू धर्म के खिलाफ बोलना करुणानिधि के लिए कोई नई बात नहीं थी। करुणानिधि ने कथित तौर पर एक बार कहा था, 'क्या हिंदुओं का कोई धर्म है? हिंदू कौन है? अगर आप कुछ राइट विंग के लोगों से पूछेंगे तो वे बताएंगे कि हिंदू का असली मतलब चोर है।

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