गोरखपुर में 30 बच्चों की मौत

August 10th, 2017 | POLITICS

गोरखपुर में 30 बच्चों की मौत

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के लिए हाहाकार, 30 बच्चों सहित 50 की मौत गुरुवार से शुरू हुई दिक्कत बीआरडी में ऑक्सीजन का संकट गुरुवार से शुरू हुआ। लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गैस खत्म हुई तो गुरुवार को दिन भर 90 जंबो सिलेंडर से ऑक्सीजन की सप्लाई हुई। रात करीब एक बजे यह भी खत्म हो गई। इससे अस्पताल में हाहाकार मच गया। साढ़े तीन बजे 50 सिलेंडर के जरिए स्थिति संभालने की कोशिश हुई। यह भी सुबह साढ़े सात बजे सूख गए। सुबह हुई दिक्कत तो हुआ हंगामा 100 बेड वार्ड में भर्ती इंसेफेलाइटिस के 73 मरीजों में से 54 वेंटिलेटर पर हैं। सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन खत्म होने पर यहां तीमारदारों का हंगामा शुरू हो गया। एम्बुबैग के सहारे मरीजों को ऑक्सीजन दी गई। इसमें लगे तीमारदार भी थक गए। एसएसबी और मोदी इंपीरियल बनी मददगार मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन संकट में एसएसबी मददगार बना.. मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन से मौतों की बात जैसे ही बाहर फैली, तीमारदारों और अन्य लोगों में अफरातफरी मच गई। सीएम योगी आदित्यनाथ की समीक्षा बैठक के एक दिन बाद ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जानलेवा लापरवाही सामने आई है। ऑक्सीजन सप्लाई ठप होने से पिछले 36 घंटे में मेडिकल कॉलेज में भर्ती 50 लोगों की मौत हो गई। इनमें 30 मासूम हैं। गुरुवार से शुरू हुए संकट पर काबू पाने में मेडिकल कॉलेज प्रशासन नाकाम रहा जो शुक्रवार को मासूमों के लिए काल बन गया। इसकी सूचना पाते ही डीएम राजीव रौतेला और सीएमओ सहित तमाम अफसर मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। पूरे मामले की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ली है। माना जा रहा है कि लापरवाह अफसरों पर जल्द ही गाज गिरेगी। बहरहाल, डीएम ने मामले की जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी बना दी है। यह कमेटी शनिवार को दोपहर 12 बजे तक रिपोर्ट देगी। मेडिकल कॉलेज में मौत की सूचना पाकर बांसगांव संसदीय सीट से भाजपा सांसद कमलेश पासवान भी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। भाजपा सांसद ने भी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की वजह से मौतों की पुष्टि की है। महज 69 लाख रुपये के बकाए को लेकर मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन की सप्लाई देने वाली फर्म ने हाथ खड़े कर दिए थे। इसके चलते लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गुरुवार को गैस खत्म हो गई तो जंबो सिलेंडरों और अम्बू बैग से मरीजों की जान बचाने की कोशिश होती रही लेकिन शुक्रवार की शाम तक 30 मासूम जान से हाथ धो बैठे। इस जानकारी के बाद प्रशासनिक अधिकारियों में हड़कंप मच गया। कमिश्नर अनिल कुमार ने मोदी इंपीरियल के मालिक को फोन करके 205 ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवाया, तब जाकर कुछ स्थिति कुछ सामान्य हो सकी। सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) सहित शहर के अन्य बड़े नर्सिंग होम से भी ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाया गया। मेडिकल कॉलेज के सूत्रों ने बताया कि ऑक्सीजन की कमी का सबसे ज्यादा खामियाजा बच्चों को भुगताना पड़ा है। शुक्रवार को सुबह 10 बजे के बाद से इंसेफेलाइटिस पीड़ित 13 बच्चों की मौत हुई है। इससे पहले भी इंसेफेलाइटिस और अन्य बीमारियों से परेशान 16 बच्चों की मौत हुई थी। इन आंकड़ों को मिला लिया जाए तो पिछले 40 घंटे में 30 बच्चों की मौत हुई है। ऑक्सीजन की कमी की वजह से 21 और बड़े लोगों की मौत भी हुई है। शुक्रवार को दिनभर मेडिकल कॉलेज में रोना-पीटना मचा रहा। तमाम लोग हाथों में बच्चे का शव लेकर जाते देखे गए। कुशीनगर के रामकोला फरेंद गांव के रहने धर्मेंद्र ने 10 दिन के बच्चे को मेडिकल कॉलेज में एडमिट कराया था लेकिन ऑक्सीजन की कमी की वजह से बच्चे की मौत हो गई। इससे पूरा परिवार गमजदा है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव मिश्रा इस गंभीर घटना को लेकर बेपरवाह दिखे। उन्होंने घटना के तत्काल बाद अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। हमारी गोरखपुर की न्यूज़ इन्वेस्टिगेटर्स टीम गयी और उसने पता लगाया की कमीशनखोरी से सूखी ऑक्सीजन गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 36 घंटे में 48 मौतों ने हर आम-ओ-खास की संवेदना झकझोर दी। इसके साथ ही व्यवस्था को लेकर तरह-तरह के सवाल भी खड़े हो गए। आखिर फर्म को ऑक्सीजन गैस की सप्लाई ठप करने का रुख क्यों अपनाना पड़ा, कई बार नोटिस के बाद भी बकाया भुगतान क्यों नहीं हुआ जैसे कई सवाल शहर की आब-ओ-हवा में तैर रहे थे। इसके साथ ही ऑक्सीजन सप्लाई में कमीशनखोरी के खेल की बातें भी उठने लगीं। मेडिकल कॉलेज से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कमीशनखोरी की लत के चलते ही यह स्थिति बनी। ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली फर्म के बकाया की फाइल इसी लिए ही लटकाई जाती रही। मेडिकल कॉलेज प्रशासन के एक अफसर की पत्नी पर बकाया भुगतान कराने के लिए ओबलाइज करने का सुझाव देने की बात भी चर्चाओं में है। सूत्रों की मानें तो अफसर की पत्नी की राय फर्म के अफसर ने सिरे से खारिज कर दी। इसके बाद फर्म की ओर से बकाया भुगतान के लिए जब भी मुलाकात की गई तो बजट न होने की बात कहते हुए जल्द व्यवस्था करने का आश्वासन दिया गया। एक अगस्त को फर्म की ओर से चार-पांच दिन के लिए गैस की सप्लाई करने के साथ ही स्पष्ट चेतावनी देते हुए बकाया भुगतान न होने की सूरत आगे सप्लाई देने में असमर्थता जताई गई थी। शाम तक फर्म को मिले 20 लाख 84 हजार मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से धड़ाधड़ मौतें शुरू हुईं तो आननफानन पुष्पा सेल्स को बकाया भुगतान की कवायद शुरू हुई। फर्म के अधिकारी दीपांकर शर्मा ने बताया कि शाम तक मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से 20 लाख 84 हजार रुपये का भुगतान फर्म को कर दिया गया था। इसके साथ ही फोन पर 30 लाख रुपये और भुगतान देने का आश्वासन मिला था। हालांकि, शाम तक उस संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं मिली। फर्म ने कंपनी को भेजी रकम, टैंकर रास्ते में दीपांकर शर्मा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज से मिली रकम आननफानन आरटीजीएस के जरिए कंपनी को भेजते हुए वहां से टैंकर डिस्पैच करा दिया गया है। राजस्थान होते हुए तीन दिनों में टैंकर शहर तक आता है, लेकिन इस बार 24 घंटे टैंकर चलाने के लिए कहा गया है। शनिवार रात तक या रविवार सुबह तक टैंकर मेडिकल कॉलेज पहुंच जाएगा।

ख़बरों से अपडेट रहने के लिए हमारा फेसबुक पेज लाइक करें…

Like this News, become a Newsinvestigator Reporter with a Click and make your voice heard.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Categories

Bollywood Crime Politics Lucknow Zyaka Other