अभी तक भारत नहीं आ पाया श्रीदेवी का पार्थिव शरीर , इस वजह से हो रही है देरी

February, 26th 2018 |BOLLYWOOD

अभी तक भारत नहीं आ पाया श्रीदेवी का पार्थिव शरीर , इस वजह से हो रही है देरी

बॉलीवुड की नामचीन हस्ती और दिग्गज अभिनेत्री श्रीदेवी का शनिवार को दुबई में रात 11 बजे निधन हो गया। वे 54 वर्ष की थीं। उनका निधन कार्डियक अरेस्ट के कारण हुआ जोकि हार्ट अटैक से भी खतरनाक है। श्रीदेवी अपने परिवार के साथ पिछले दिनों भतीजे और अभिनेता मोहित मारवाह की शादी में शामिल होने के लिए दुबई में थीं। उनका देहांत हुए 24 घंटों से ज्यादा का समय हो चुका है। लेकिन अभी भी उनका पार्थिव शरीर भारत नहीं लाया जा सका है। ख़बरों की मानें तो लैब रिपोर्ट नहीं आने के कारण ये समय लग रहा है। और अभी तक ये साफ़ नहीं हो सका है कितना समय और लगेगा। इस बारे में हम आपको बता रहे हैं की किस प्रक्रिया के तहत विदेश से शव लाया जाता है।

क्या है विदेश से शव लाने की प्रक्रिया ?
विदेश में हुई किसी भी मृत्यु के मामले में शव को भारत वापस लाने के लिए कई दस्तावेजों की जरूरत होती है। विदेश मंत्रालय ने इससे जुड़ी विस्तृत जानकारी अपनी वेबसाइट पर दे रखी है। इसके मुताबिक़ शव वापसी के लिए मेडिकल रिपोर्ट और डेथ सर्टिफिकेट ज़रूरी है, जो कि स्थानीय अस्पताल से जारी किया गया हो।

पुलिस रिपोर्ट की कॉपी अगर एक्सीडेंटल या अननेचुरल डेथ का मामला हो (इसके इंग्लिश ट्रांसलेशन की कॉपी अगर रिपोर्ट किसी अन्य भाषा में लिखी हो तो) मृतक के किसी नजदीकी परिजन से कंसेंट लेटर जो की नोटरी से अटेस्टेड हो, पासपोर्ट और वीजा के पन्नों की कॉपी (निरस्तीकरण के लिए) इन दस्तावेजों के अलावा शव पर लेपन का क्लीयरेंस और उसकी व्यवस्था भी ज़रूरी है। स्थानीय इमीग्रेशन और कस्टम से क्लीयरेंस भी जरूरी होता है। मृतक किसी संक्रामक रोग से पीड़ित नहीं था, इसका सर्टिफ़िकेट भी जरूरी होता है। ये तमाम नियम देश के हिसाब से कुछ बदल सकते हैं पर मूलत: इसी तरह के रहते हैं।

नेचुरल डेथ के मामले में सबको वापस लाने में बहुत देर नहीं लगती, लेकिन अननेचुरल डेथ के मामले में यह प्रक्रिया लंबी चलती है, क्योंकि स्थानीय स्तर पर पुलिस उसकी जांच पड़ताल करती है और उससे जुड़े सबूत जुटाती है। शव को वापस लाने की प्रक्रिया के दौरान भारतीय दूतावास कांसुलेट लगातार मृतक के परिजनों के संपर्क में रहते हैं।

अगर कोई उसी देश में शव का अंतिम संस्कार चाहता है तो उसकी प्रक्रिया भी कमोबेश समान है। हालांकि दुनिया के ज़्यादातर देश मुस्लिम मृतक के मामले में ही अंतिम संस्कार की इजाजत देते हैं। ग़ैर मुस्लिम मृतकों को उनके नागरिकता वाले देश को भेजा जाना अनिवार्य होता है। वहीं, लावारिस शव के मामले में स्थानीय प्रशासन अपने हिसाब से फैसला लेता है।

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